Poetry

ہوا نہ زور سے اس کے کوئی گریباں

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ہوا نہ زور سے اس کے کوئی گریباں چاک
اگرچہ مغربیوں کا جنوں بھی تھا چالاک

مے یقیں سے ضمیر حیات ہے پرسوز
نصیب مدرسہ یا رب یہ آب آتش ناک

عروج آدم خاکی کے منتظر ہیں تمام
یہ کہکشاں یہ ستارے یہ نیلگوں افلاک

یہی زمانۂ حاضر کی کائنات ہے کیا
دماغ روشن و دل تیرہ و نگہ بیباک

تو بے بصر ہو تو یہ مانع نگاہ بھی ہے
وگرنہ آگ ہے مومن جہاں خس و خاشاک

زمانہ عقل کو سمجھا ہوا ہے مشعل راہ
کسے خبر کہ جنوں بھی ہے صاحب ادراک

جہاں تمام ہے میراث مرد مومن کی
مرے کلام پہ حجت ہے نکتۂ لولاک

हवा ने अपने किसी भी गरीब चाक को मजबूर नहीं किया
हालांकि पश्चिम के राक्षस भी चालाक थे

मेरे पास जलती हुई अंतरात्मा है
नसीब मदरसा या भगवान यह उग्र जल

सभी एडम खाकी के उदय की प्रतीक्षा कर रहे हैं
ये आकाशगंगा, ये तारे, ये नीला आसमान

क्या यह आधुनिक ब्रह्मांड है?
मन उज्ज्वल है और हृदय तेरह है और आंखें निर्भय हैं

अगर आप अंधे हैं तो ये भी है बाधा
नहीं तो आग आस्तिक का ठिकाना है

कारण की उम्र को एक बीकन के रूप में समझा जाता है
कौन जानता है कि जिन्न भी साहिब इदरकी हैं

जहाँ सब ईमानवाले की विरासत है
मौत के शब्द पर एक तर्क है

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